शुक्रवार, 30 दिसंबर 2022

अहोरात्र

 

   *हमारा भारत - श्रेष्ठ भारत !!*

   भारतीय ज्योतिष में एक शब्द होता है, अहोरात्र ...अर्थात एक दिन और एक रात यानि कि 24 घण्टे । इस अहोरात्र में से अपभ्रंश (किसी शब्द का बिगड़ा हुआ रूप) होकर के शब्द बना - होरा।  जो कि अहोरात्र में से अ और त्र के हटने से बना । एक दिन में 24 होरा होती थीं और ये वो समय होता था, जिसमें पृथ्वी 15 डिग्री घूम जाती है । इस प्रकार 24 होरा में पृथ्वी 360 अंश घूम जाती है। इसी होरा, यानि कि पृथ्वी के घूमने के समय के अध्ययन को ज्योतिष में 'होराशास्त्र' कहते हैं ।
अभिनंदन शर्मा जी कल रात को फ़िल्म देख रहे थे, पाइरेट्स ऑफ केरेबियन, पांचवां भाग । उसमें एक शब्द आया - होरोलॉजिस्ट ।उन्होंने  गूगल किया तो पता चला कि समय के अध्ययन करने वाले को, घण्टे के अध्ययन करने वाले को और घड़ियों का अध्ययन (समय) करने वाले को होरोलॉजिस्ट कहते हैं । ये होरोलॉजिस्ट शब्द कहाँ से आया, अब ये आपको बताने की आवश्यकता नहीं है । पर इसी होरा से एक शब्द और निकल कर आया, जो होरा के अपभ्रंश से बना और वो है - hour यानि 1 घण्टे का समय।  एक दिन में 24 pहोरा होती हैं और एक दिन में 24 घण्टे होते हैं ।  हमारे यहां होरा, अर्थात जितने समय मे पृथ्वी 15 अंश घूम जाये पर अंग्रेजों का hour यदि अलग और स्वतंत्र टर्म है तो कोई बताये कि 1 घण्टे का समय किस आधार पर लिया गया ? और पश्चिमी विज्ञान द्वारा, 1 दिन में 24 घंटे होने का क्या आधार है ?

ज्यादा विज्ञान विज्ञान न किया करें, सारा पश्चिमी विज्ञान, भारतीय विज्ञान के पेट से ही निकल कर गया है । बस फर्क इतना है कि उन्होंने पूरी दुनिया पर राज किया सो हर देश के विज्ञान को जल्दी कॉपी कर पाये और सब देशों को लूटा सो मशीनों पर इन्वेस्ट कर पाये। इसलिये भारतीय विज्ञान को कमजोर और पुरातन समझने की भूल न करें ।

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शुक्रवार, 23 दिसंबर 2022

मुफ्त मुफ्त मुफ्त

 

कुमार सतीश जी बतलाते है कि जब मैं बच्चा था तो मम्मी मुझे डराने के लिए कहती थी.... गर्मी के दोपहर में बाहर खेलने मत जाया करो...
क्योंकि, बाहर में लकडसुंघा घूमते रहते हैं.

वो तुम्हें .... किसी गिफ्ट (चॉकलेट आदि) का लालच देकर तुम्हें एक लकड़ी सुंघा कर बेहोश कर देंगे और फिर बोरे में भर कर लेकर भाग जाएंगे.

तो.... उस समय मेरे मन में लकडसुंघा की जो काल्पनिक छवि उभरती थी.... वो होती थी कि...

एक बूढ़ा आदमी अपने एक कंधे पर बोरा/बड़ा सा झोला टांगा हुआ है और वो बच्चों को गिफ्ट बांट रहा है.

समझ लो कि... ठीक अपने संता भैया की ही छवि उभरती थी.

ये तो बहुत बाद में पता लगा कि.... ये लकडसुंघा करके कोई नहीं होता है और वो मम्मी सिर्फ हमें डराने के लिए ही बोलती थी...!

साथ में ये भी पता चला कि.... भले ही लकडसुंघा एक काल्पनिक पात्र है... लेकिन, समाज में फ्रॉड तो होता ही है.

जैसे कि...
अभी हाल फिलहाल में ही ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाओं में काफी वृद्धि देखने को मिल रही है.

फ्रॉड भी ऐसा ऐसा कि सर घूम जाए.

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उदाहरण के लिए ...

हम सब जानते हैं कि.... किसी को अपने बैंक का डिटेल , क्रेडिट/डेबिट कार्ड का नंबर , पासवर्ड आदि नहीं देना चाहिए क्योंकि वो ऑनलाइन फ्रॉड होता है.

लेकिन, अब फ्रॉड का एक नया चलन आया है.

जिसमें... एक आदमी आपके घर कोई पार्सल डिलीवरी देने को आता है...!

लेकिन, चूँकि... आपने ऐसा कोई आर्डर नहीं किया होता है तो आप वो पार्सल डिलीवरी देने से मना कर देते हैं.

फिर, वो डिलीवरी बॉय कहता है कि... सर, अगर आप पार्सल नहीं लेना चाहते हैं तो फिर इस आर्डर को कैंसिल करना होगा.

लेकिन, जब आपने आर्डर ही नहीं किया है तो भला आप उसे कैंसिल कैसे करेंगे.

फिर, डिलीवरी बॉय खुद अपने मोबाइल से आर्डर कैंसिल करने का एक उपक्रम करता है और उस प्रोसेस को पूरा करने के लिए आपके मोबाइल में आया OTP मांगता है.

असल में वो पासवर्ड ... किसी आर्डर कैंसिलेशन का नहीं बल्कि आपके बैंक के ट्रांसेजक्शन को कंप्लीट करने का OTP होता है.

इसीलिए, इधर आपने उसे वो OTP दिया और उधर आपके बैंक एकाउंट से पैसा निकाल लिया जाता है.

तथा... ऐसे फ्रॉड सिर्फ आजकल नहीं हो रहे हैं बल्कि आज से पहले भी जब ऑनलाइन का जमाना नहीं था तो ऐसे फ्रॉड देखने को आते थे कि आपको एक भारी सा पार्सल आ जाता था (TO PAY के रूप में)

आप उसे किसी का भेजा हुआ गिफ्ट समझ कर वो पार्सल छुड़वा लेते थे.

बाद में पार्सल खोलने पर पता लगता था कि अरे यार.... आपको तो चूसिया बनाया गया है... क्योंकि, पार्सल के नाम पर ईंट-पत्थर या लकड़ी के टुकड़े भेज कर आपसे मोटी रकम वसूल कर ली गई है..!

तो, कहने का मतलब है कि.... धोखाधड़ी कोई नई बात नहीं बल्कि जब से इंसानों में बुद्धि का विकास हुआ है... धोखाधड़ी तब से चली आ रही है.

क्योंकि... गिफ्ट के नाम पर धोखाधड़ी करना एक बहुत पुरानी समस्या है.

अंतर सिर्फ ये है कि.... गिफ्ट के नाम पर हाल फिलहाल में धोखाधड़ी पैसों की जाती है..

जबकि, पहले ये धोखाधड़ी ... संता भैया द्वारा मजहब की... की जाती थी.

महजब की धोखाधड़ी का मतलब ये है कि.... पार्सल के रूप में आप को पैकेट में कंकड़-पत्थर वाला मजहब पकड़ा दिया जाता था... और, आपसे आपके शुद्ध स्वर्णिम धर्म को ले लिया जाता था.

खैर...

चूँकि... पार्सल और OTP के द्वारा धोखाधड़ी की ये परंपरा बेहद पुरानी है.

इसीलिए.... ऐसे कोई भी लोग ... जो आपको मुफ्त में गिफ्ट दे अथवा गिफ्ट देने का लालच दे कि.... "हम आएंगे और तुम्हारे लिए गिफ्ट लाएंगे" से बेहद सावधान रहने की जरूरत है.

क्योंकि, उस तथाकथित मुफ्त की कीमत.... आपके धर्म से लेकर, परंपरा और सभ्यता-संस्कृति तक हो सकती है.

इसीलिए... जागरूक रहें.. सुरक्षित रहें... एवं, डंडा थैरेपी से ऐसे मुफ्त के गिफ्टिये का इलाज करते रहें...!

क्योंकि, लकडसुंघा भले ही काल्पनिक हो...
लेकिन, फ्री गिफ्ट के नाम पर धोखाधड़ी करते दिखते ये सब कोई कल्पना नहीं है.

सोमवार, 19 दिसंबर 2022

बहुमूल्य रत्न

 

*चिंतन की धारा.....*

 
परिचित पंकज झा जी के एक प्रसंग प्रस्तुतिकरण ने मन मोह लिया, थोड़े में बहुत कह दिया , चिंतन को दिशा देने वाला !!
उन्होंने बताया - मेरा थोड़ा-बहुत विश्वास ज्योतिष विद्या में है। स्वर्णिम समय था  यह विद्या सीखने का, पर चूक गए ।  वर्तमनातः इससे जुड़ा एक सुंदर प्रसंग।

एक विद्वान मित्र हैं अपने। हर विधा के विधायक अर्थात् पारंगत। शायद ही कोई विषय हो जिस पर वे साधिकार बात नहीं करते हों। मूलतः पेशातः वे पत्रकार ही हैं। तो पिछले दिनों जिज्ञासावश अपन ने भी अपने जन्म से संबंधित विवरण उन्हें भेज दिया। देर रात फोन आया। उन्होंने अनेक विश्लेषण के उपरांत दो उपाय बताये।

पहला - मां समान किसी स्त्री की सेवा सम्पूर्ण भक्ति भाव से करें। वे प्रसन्न होंगी तो अधिक और कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। दूसरा - नीलम समान ‘नीली’ छः रत्ती मध्यमा अंगुली में धारण करना है। इन उपायों के बाद और कुछ करने की आवश्यकता नहीं।

अपन ने पूछा उनसे कि ‘नीलम समान’ का मंतव्य तो समझा कि वह अपेक्षाकृत काफी सस्ता और सुलभ होगा तो असली नहीं भी पहनें तो चलेगा। साथ ही इस जेम्स के कुछ दुष्प्रभाव भी संभावित होते हैं इसलिए ‘प्रतिकृति’ पहनना प्रथमतः उचित। किंतु …

किंतु क्या मां समान के बजाय ‘माँ’ ही हों तो कोई समस्या है? क्या यहां भी ‘नीलम-नीली’ विषय प्रासंगिक है? उन्होंने कहा कि बिल्कुल नहीं! कदापि नहीं। कथमपि नहीं। क्वचिदपि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि एकल परिवार के इस युग में क्योंकि यह अंडरस्टुड है कि ‘मां-पिता’ के संग नहीं होंगे, इसलिए मां समान स्त्री की पूजा को कहा। अन्यथा मां की पूजा हो, फिर और क्या चाहिये भला? फिर तो नीलम-नीली झंझट की भी आवश्यकता अधिक नहीं। शनि फिर क्या बिगाड़ सकते किसी जातक का भला? आदि अनादि।

मुझे स्मरण हो आया रामायण का प्रसंग। स्वायंभुव मनु और सतरूपा ने भगवान विष्णु की तपस्या की। प्रसन्न होने पर भगवान से यह मांगा कि ‘उन्हीं के समान’ पुत्र हो दंपत्ति को। राजीव नयन ने कहा  - आपु सरिस खोजौं कहँ जाई, नृप तव तनय होब मैं आई! अर्थात् अपने समान मैं कहां खोजने जाऊंगा भला, मैं स्वयं आपके पुत्र के रूप में आऊंगा।

आगे की कथा तो मानवता जानती ही है। श्रीराम का जन्म और मर्यादा की पुनर्स्थापना तक का प्रसंग….. हालांकि पुत्रों के कुपुत्र होने की तो अब श्रृंखला है, पर क्वचिदपि कुमाता न भवति की शास्त्रोक्त आश्वासन आज तक निरंतर और अनवरत कायम है। तो मां समान खोजने के बजाय माँ ही हों तो क्या सर्वोत्तम नहीं होगा? है न?

बड़ी संख्या में समाज में ऐसे ज्योतिषियों की आवश्यकता है जो ऐसे उपाय अवश्य बतायें जातक को कि ग्रह शांति चाहिये तो नीलम भले न पहन पायें, सोने में नीली भी पहनना छोड़ दें… पर मातृ सेवा मात्रानाम नीलम धारण फल लभेत!  🙏
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रविवार, 18 दिसंबर 2022

सही सोच

 

साक्षात्कार चल रहा था !

नोकरी बड़ी अच्छी और अच्छे वेतन वाली थी साक्षात्कार में कई युवक आये हुए थे !

सभी युवक अच्छे पढ़े लिखे एवं सुसंस्कृत थे !

चपरासी ने आकर पहले युवक को आवाज लगाई !

युवक अपनी फ़ाइल ले कर चेम्बर में घुसा और बोला में आई कमिंग सर ?

साक्षात्कार लेने वाले ने कहा "यस" थैंक यू कहकर युवक अंदर चला गया और सामने वाली कुर्सी पर बेठ गया !

साक्षात्कार लेने वाले उसकी फ़ाइल देखीं वैरी गुड कह पुछा :

"एक बात बताइये आप कही जा रहे है
आपकी कार टू सीटर है!
आगे चलने पर एक बस स्टैंड पर आपने देखा कि तीन व्यक्ति बस के इंतजार में खड़े है!

उन में से एक वृद्धा जो कि करीब ९० वर्ष की है
तथा बीमार है अगर उसे अस्पताल नहीं पहुचाया गया तो इलाज न मिल सकने के कारण मर भी सकती है!

दूसरा आपका एक बहुत ही पक्का मित्र है जिसने आपकी एक समय बहुत मदद कि थी
जिसके कारण आप आज का दिन देख रहे है!

तीसरा इंसान एक बहुत ही खूबसूरत युवती है जिसे आप बेहद प्रेम करते है जो आपकी ड्रीम गर्ल है

अब आप उन तीनो में से किसे लिफ्ट देंगे आपकी कार में केवल एक ही व्यक्ति आ सकता है !

युवक ने एक पल सोचा फिर जवाब दिया" सर में अपनी ड्रीम गर्ल को लिफ्ट दूंगा "

साक्षात्कार लेने वाले पुछा क्या ये ना इंसाफी नहीं है ?

युवक बोला नो सर वृद्धा तो आज नहीं तो कल मर जायेगी।

दोस्त को में फिर भी मिल सकता हूँ पर अगर मेरी ड्रीम गर्ल एक बार चली गई तो फिर में उससे दुबारा कभी नहीं मिल सकूंगा !

साक्षात्कार लेने वाले ने मुस्कुरा कर कहा वेरी गुड में तुम्हारी साफ साफ बात सुन कर प्रभावित हुआ अब आप जा सकते है !

थैंक यू कहकर युवक बाहर निकल गया !

साक्षात्कार लेने वाले ने दूसरे प्रत्याशी को बुलाने के लिए चपरासी को कहा!

साक्षात्कार लेने वाले ने सभी प्रत्याशिओं से उपरोक्त प्रश्न को पुछा विभिन्न प्रत्याशियों ने विभिन्न उत्तर दिए !

किसी ने वृद्धा को लिफ्ट देने किसी ने दोस्त को लिफ्ट देने कि बात कही !

जब एक प्रत्याशी से ये ही प्रश्न पुछा तो उसने उत्तर दिया

"सर में अपनी कार कि चाबी अपने दोस्त को दूंगा और उससे कहूंगा कि वो मेरी कार में वृद्धा को लेकर उसे अस्पताल छोड़ता हुआ अपने घर चला जाये !

में उससे अपनी कार बाद में ले लूंगा और स्वयं अपनी ड्रीम गर्ल के साथ बस में बैठ क़र चला जाऊँगा !

साक्षत्कार करने वाले ने उठ क़र उस से हाथ मिलाया और कहा यू आर सलेक्टेड!
थैंक यू सर कह क़र युवक मुस्कुराता हुआ बाहर आ गया !

साक्षत्कार समाप्त हो   चुका था !
~~

जीवन में अपने कर्म , अपनी कार्यस्थली को सहेजते हुवे भी पारिवारिक दायित्व के साथ समाज - राष्ट्र के कर्तव्यों का पालन होता रहे, ऐसी सोच विकसित करते रहें, सहजता से सकारात्मक होते रहें । 

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