सोमवार, 5 जून 2023

धर्म में सुधार - चिन्तन

 

चिन्तन के पल
समझने योग्य

एक बार स्वामी विवेकानन्द जी से किसी ने जिज्ञासा की कि “हिन्दुओं में बाल विवाह होता है, ये गलत है, हिन्दू धर्म में सुधार होना चाहिए कि नहीं?
स्वामी जी ने उस से पूछा :-"क्या हिन्दू धर्म ने कभी कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति का विवाह होना चाहिए और वह विवाह उसके बाल्यकाल में ही होना चाहिए "
प्रश्न पूछनेवाला थोडा सा सकपकाया फिर भी जिद करते हुए बोला ...."हिन्दुओं में बाल विवाह नहीं होते क्या ?
स्वामी जी :- पहले ये बताओ "विवाह का प्रचलन हिन्दू समाज में है अथवा हिन्दू धर्म में।
धर्म तो ब्रह्मचर्य पर बल देता है। 25 वर्ष की अवस्था से पहले गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने की अनुमति कोई स्मृति नहीं देती और
स्मृति भी तो समाज-शास्त्र ही है,ये समाज
का विधान है' ..... स्वामी जी ने थोड़ा विराम
लिया और फिर से बोले :- धर्म तो विवाह की बात
करता ही नहीं है। धर्म , पत्नी प्राप्ति की नहीं, ईश्वर -प्राप्ति की बात करता है।
प्रश्न फिर हुआ-स्वामी जी सुधार होना तो जरूरी है ।
स्वामी जी :अब आप स्वयं ही निर्णय करें कि सुधार किसका होना जरूरी है .. समाज का या हिन्दू धर्म का ...

हमें धर्म-सुधार की नहीं, समाज सुधार की जरूरत है और ये ही अपराध हम अब तक करते आ रहे हैं ... हमें समाज- सुधार की जरूरत थी और करने लग गए धर्म में सुधार।
स्वामी जी आगे बोले ...धर्म सुधार के नाम पर हिन्दुओं का सुधार तो नहीं हुआ किन्तु ये सत्य है कि हिन्दुओं का विभाजन अवश्य हो गया। उनमें हीन भावना अधिक गहरी जम गई।
धर्म सुधार के नाम पर नए -नए सम्प्रदाय बनते गए
और वो सब हिन्दू समाज के दोषों को,हिन्दू धर्म से
जोड़ते रहे और इनको ही गिनाते रहे साथ ही साथ ये सम्प्रदाय भी एक दूसरे से दूर होते गए । 

   सब में एक प्रतिस्पर्धा सी आ गई और हर सम्प्रदाय आज इसमें जीतना चाहता है, प्रथम आना चाहता है।हिन्दू धर्म की आलोचना करके "शासन की कृपा पाना चाहता है और उसके लिए हिन्दू धर्म की आलोचना करना सबसे सरल उपाय है ... आज देखो, ये जितने भी सम्प्रदाय हैं हिन्दुओं की तुलना में ईसाईयों के अधिक निकट हो गए हैं। वे हिन्दू समाज के दोषों को -हिन्दू धर्म के साथ जोड़कर हिन्दुओं के दोष और ईसाईयों के गुण बताते हैं। पहले ही हिन्दू मुगलों की हिंसा से पीड़ित रहे हैं। ये दुर्भाग्य ही तो है ..समाज सुधार को ..धर्मके सुधार से जोड़ देना ..जबकि धर्म में सुधार की जरूरत ही नहीं थी .जरूरत तो केवल धर्म के अनुसार समाज में सुधार करने की है।

_________🌱_________
*शनि-रवि-सोम प्रेरक प्रसंग । यदा कदा तत्कालीन प्रसंग - स्वास्थ्य - हास्य ...*    👉🏼
https://chat.whatsapp.com/H0Qv5FCw4XG3NV5qeChAZ0
_________🌱__________

रविवार, 4 जून 2023

असली खुशी

 

कहानी

पूरे चार महीने बाद वो शहर से कमाकर गाँव लौटा था। अम्मा उसे देखते ही चहकी...

"आ गया मेरा लाल! कितना दुबला हो गया है रे! खाली पैसे बचाने के चक्कर में ढंग से खाता-पीता भी नहीं क्या!"

"बारह घंटे की ड्यूटी है अम्मा, बैठकर थोड़े खाना है! ये लो, तुम्हारी मनपसंद मिठाई!"--कहकर उसने मिठाई का डिब्बा माँ को थमा दी!

"कितने की है?"

"साढ़े तीन सौ की!"

"इस पैसे का फल नहीं खा सकता था! अब तो अंगूर का सीजन भी आ गया है!"--अम्मा ने उलाहना दिया।

पूरा दिन गाँव-घर से मिलने में बीत गया था! रात हुई, एकांत में उसने बैग खोलकर एक पैकेट निकाला और पत्नी की ओर बढ़ा दिया--

"क्या है ये?"

"चॉकलेट का डिब्बा, खास तुम्हारे लिए!"

"केवल मेरे लिए ही क्यों!"

"अरे समझा करो। सबके लिए तो मिठाई लायी ही है!"

"कितने का है?"

"आठ सौ का!"

"हांय!!"

"विदेशी ब्रांड है!"

"तो क्या हुआ!"

"तुम नहीं समझोगी! खाना, तब बताना!"

"पर घर में और लोग भी हैं। अम्मा, बाबूजी, तीन तीन भौजाइयां, भतीजे। सब खा लेते तो क्या हर्ज था!"

"अरे पगली, बस चार पीस ही है इसमें, सबके लिए कहाँ से लाता!"

"तो तोड़कर खा लेते!"

"और तुम!"

"बहुत मानते हैं मुझे?"

"ये भी कोई कहने की चीज है!"

"आह! कितनी भाग्यशाली हूँ मैं जो तुम मुझे मिले!"

उसकी आँखें चमक उठी--"मेरे जैसा पति बहुत भाग्य से मिलता है!"

"सच है! लेकिन पता है, ये सौभाग्य मुझे किसने दिया है?"

"किसने?"

"तुम्हारी अम्मा और बाबूजी ने! उन्होंने ही तुम्हारे जैसा हट्टा-कट्टा, सुंदर और प्यार करने वाला पति मुझे दिया है! सोचो, तुम्हारे जन्म पर खुशी मनाने के लिए मैं नहीं थी, एक अबोध शिशु से जवान बनने तक, पढ़ाने-लिखाने और नौकरी लायक बनाने तक मैं नहीं थी। मैं तुम्हारे जीवन में आऊं, इस लायक भी उन्होंने ही तुम्हें बनाया!"

"तुम आखिर कहना क्या चाहती हो?"

"यही कि ये पैकेट अब सुबह ही खुलेगा! एक माँ है, जो साढ़े तीन सौ की मिठाई पर भी इसलिए गुस्सा होती है कि उसके बेटे ने उन पैसों को अपने ऊपर खर्च नहीं किया! और वो बेटा आठ सौ का चॉकलेट चुपके से अपनी बीवी को दे, ये ठीक लग रहा है तुम्हें!"

वो चुप हो गया! पत्नी ने बोलना जारी रखा...

"अम्मा-बाबूजी और लोग गाँव में रहते हैं! तुम ही एकमात्र शहरी हो। बहुत सारी चीजें ऐसी होंगी, जो उन्हें इस जनम में नसीब तो क्या, उनका नाम भी सुनने को नहीं मिलेगा! भगवान ने तुम्हें ये सौभाग्य दिया है कि तुम उन्हें ऐसी अनसुनी-अनदेखी खुशियां दो! वैसे कल को हमारे भी बेटे होंगे! अगर यही सब वे करेंगे तो.......!"

अचानक उसे झटका लगा। चॉकलेट का डिब्बा वापस बैग में रख वो बिस्तर पर करवट बदल सुबकने लगा!

"क्या हुआ? बुरा लगा सुनकर!"

"..............!"

"मर्दों को रोना शोभा नहीं देता! खुद की खुशियों को पहचानना सीखो! जीवन का असल सुख परिजनों को खुश देखने में है! समझे पिया!"
-कृपा शंकर मिश्र "खलनायक" ,गाजीपुर, उ0प्र0

_________🌱_________
*शनि-रवि-सोम प्रेरक प्रसंग । यदा कदा तत्कालीन प्रसंग - स्वास्थ्य - हास्य ...*    👉🏼
https://chat.whatsapp.com/H0Qv5FCw4XG3NV5qeChAZ0
_________🌱__________

शनिवार, 3 जून 2023

उर्मिला 26

 

उर्मिला 26
शत्रुघ्न चुपचाप देखते रहे अपने बड़े भाई की ओर, जैसे किसी देवता की मूरत को निहार रहे हों। फिर मुस्कुरा कर कहा, "मैं सचमुच परिहास ही कर रहा था भइया। भाभी ने कहा है, "आप उनकी चिन्ता न कीजियेगा... राजा जनक की बेटी अयोध्या राजमहल के आंगन को अपने आँचल से बांध कर रखेगी। कुछ न बिखरेगा, कुछ न टूटेगा..."
     शत्रुघ्न की आँखे भीगने लगी थीं। लखन ने उन्हें प्रेम से गले लगा लिया।
  शत्रुघ्न लक्ष्मण के पास से स्त्रियों के खेमे में आये और सीधे उर्मिला के पास चले गए। उनका मन अभी भी शांत नहीं हुआ था। चुकी वे सबसे छोटे थे इसलिए सहजता से कोई भी प्रश्न पूछ सकने का अधिकार रखते थे। उन्होंने उलझे हुए स्वर में पूछा, "क्या आप सचमुच भइया से मिलना नहीं चाहतीं भाभी?"

    उर्मिला के अधरों पर क्षणिक मुस्कान तैर उठी। कहा, "इसकी क्या आवश्यकता देवर जी? हम साथ ही तो हैं..."
   "तो जब मिलना ही नहीं था तो इस गहन वन में आई क्यों भाभी?" शत्रुघ्न की उलझन बढ़ती जा रही थी।
    "हम तो अयोध्या की प्रजा होने के नाते अपने महाराज को वापस ले जाने आये थे देवर जी! अनुज वधु होने के नाते अपने कुल के ज्येष्ठ को यह बताने आये थे कि उनके सारे बच्चे उनके चरणों में श्रद्धा रखते हैं। पर यहाँ आ कर देखा कि वे हमारी कल्पना से भी अधिक बड़े हैं। उनके अंदर सबके लिए प्रेम ही प्रेम है। उनके अश्रु उन्हें देवता बना गए देवर जी! हम राजा लेने आये थे, देवता ले कर लौटेंगे। और लगे हाथ यह भी लाभ हो गया कि आपके भइया को जी भर के देख भी लिया, अन्यथा मेरा तपस्वी पति मुझे चौदह वर्षों तक कहाँ मिलना था?" उर्मिला के मुख पर संतुष्टि के अद्भुत भाव पसरे हुए थे।
     "यह प्रेम का कौन सा रूप है भाभी? मैं न पूर्णतः भइया को समझ पा रहा हूँ, न आपको..." शत्रुघ्न की उलझन कम नहीं हो रही थी।
      "प्रेम को भी कभी धर्म से विमुख नहीं होना चाहिये देवरजी! हाथ से धर्म की डोर छूट जाय तो प्रेम दैहिक आकर्षण भर रह जाता है। ज्येष्ठ के प्रति पूर्ण समर्पण उनका धर्म है, और उनके धर्म के प्रति पूर्ण निष्ठा रखना मेरा धर्म है। हम दोनों अपने धर्म पर अडिग रहें, यही हमारे प्रेम का आदर्श है। हमारा जो निर्णय आपको प्रेम के विरुद्ध लग रहा है, वस्तुतः वही हमारे प्रेम की प्रगाढ़ता सिद्ध करता है।" उर्मिला मुस्कुरा उठी थीं।
      शत्रुघ्न उलझ से गए थे। सर झटक कर बोले, "मैं आप दोनों को प्रणाम करता हूँ। पर मुझे अब भी कुछ समझ नहीं आ रहा।"
      उर्मिला ने हँसते हुए चिढ़ाया, "आप अभी बच्चे हैं देवर जी! आप प्रेम को नहीं समझ पाएंगे। जाइये, वापसी की व्यवस्था देखिये।"
      शत्रुघ्न बोले, "मेरे लिए वही ठीक है भाभी... मैं चला।" वे बाहर निकल गए और भैया भरत के पास जा कर उनके आदेश की प्रतीक्षा करने लगे।
      वापसी की बेला आ गयी। राम को छोड़ कर कोई जाना नहीं चाहता था, पर राम के बार बार कहने पर सभी मन मार कर तैयार हो गए थे।
       सत्ता के लिए राम और भरत में छिड़े द्वंद में राम की ही चली थी, पर अयोध्या की दृष्टि में भरत विजयी हुए थे। भरत का समर्पण उन्हें बहुत बड़ा बना गया था।
      राम की पादुकाओं को माथे पर रख कर भरत चलने को सज्ज हुए। चलने से पूर्व उन्होंने तेज स्वर में कहा, "राजा राम की जय।"
      उपस्थित जनसमूह चिल्ला उठा, "हमारे भरत की जय..."
      उर्मिला ने एक बार पीछे मुड़ कर देखा लक्ष्मण की ओर! आंखों में उस तपस्वी की छवि भर ली और शीघ्रता से मुड़ गयीं, ताकि लक्ष्मण की दृष्टि न पड़े...
क्रमशः
(पौराणिक पात्रों व कथानक लेखनी के धनी श्री सर्वेश तिवारी श्रीमुख द्वारा लिखित ये कथा इतनी प्यारी व आकर्षण भरी लगी, कि शेयर करने के लोभ को रोक न पाया )
_________🌱_________
*शनि-रवि-सोम प्रेरक प्रसंग । यदा कदा तत्कालीन प्रसंग - स्वास्थ्य - हास्य ...*    👉🏼
https://chat.whatsapp.com/H0Qv5FCw4XG3NV5qeChAZ0
_________🌱__________

शुक्रवार, 2 जून 2023

चिन्तन के पल

 

चिन्तन की धारा
बात में दम है , ऐसी घटनाएं ख़ुद मैंने देखी है , हाँ, इत्तेफाक हो सकता है । पर चर्चाओं का होना सुखद ... सावधानी दुर्घटना टालती है ।। समीर कुमार सिंह की इस चर्चा को महज़ जागरूकता के संदर्भ में लेवें -
~~~
  आपके लड़के की उम्र है १५ या २० साल। इस उम्र में उसको साल में पाँच छह बार जींस पैंट या टीशर्ट ख़रीदने की आदत होती है। वो जाकर ख़रीद लेता हैं। ख़रीदने के बाद पहनता है और घूमने या खेलने या कोचिंग करने निकल पड़ता है।

वहाँ उसको मिलते हैं उसके एक दो मुस्लिम दोस्त भी। वहाँ पर देखते ही तारीफ़ होती है किं  ये टीशर्ट तो एकदम ग़ज़बे लग रहा है। कितने में लिये?
सही है यार।

इसके बाद वह मुस्लिम दोस्त बताता है....अरे एक मेरा दोस्त का या भाई का अमुक जगह पर मार्केट में एक दुकान है। वहाँ एकदम लेटेस्ट और ज़बरदस्त क्वालिटी के कपड़े या जूते मिलेंगे। इतने कम में तो सोच भी नहीं सकते हो।

अब आपके लड़के की आँखें चमक उठेंगी, उम्र ही ऐसी है, जितने नये कपड़े और जूते मिल जायें....कम पड़ते हैं। वह आज ही कपड़े ख़रीद कर पहना है लेकिन एक दो दिन में ही उस अमुक दुकान में जाएगा।

वहाँ जाते ही आपका नाम बता कर आपस में ये लोग इशारे कर लेते हैं। आपके लड़के को एकदम से सस्ते में जींस पेंट शर्ट जूते चप्पल आदि मिल जाएँगे और आपके लड़के को ऐसा लगेगा कि जैसे इस कोचिंग वाले दोस्त ने उसके ऊपर बहुत बड़ा एहसान कर दिया है।
जो मुस्लिम दोस्त आपके लड़के को ले गया था, उससे दोस्ती बढ़ेगी, दिन रात msg और कॉल पर बातें या मिलना जुलना ज्यादा बढ़ जाएगा। वह किसी भी चीज की ख़रीदारी के लिए सस्ते में दुकान बताएगा।

आपको पता नहीं चलेगा कि आपका ये हिंदू बेटा कब और कैसे अपने धर्म से विमुख होकर इस्लाम से प्रभावित हो गया है। उसको हिंदू दोस्तों से ज़्यादा मुस्लिम दोस्त बहुत अच्छे लगने लगेंगे क्योंकि कोई सस्ते में पैंट  दे रहा है कोई चप्पल दे रहा है तो कोई १०० की जगह २५ में ही मोबाइल रिपेयर करके दे दे रहा है।

एकदम same सिचुएशन आपकी बेटी के साथ भी होता है , आपका ही लड़का नये नये चीजों को दिखा कर अपनी बहन को कहता है कि मेरा एक अब्दुल, आफ़ताब, साहिल दोस्त है जिसके वजह से इतने सस्ते में ये सारी चीजें मिली है।

और बेटी को तो १०० का माल २५ में नहीं बल्कि मुफ़्त में ....'गिफ्ट; के तौर पर दिया जाता है। वह बेटी मोबाइल, घागरा, पर्स आदि लेते लेते एक दिन रेस्टोरेंट में मुफ़्त का खाना खाने भी पहुँच जाती है जहां एक प्लेट की क़ीमत २ हज़ार से ३ हज़ार भी होता है एकदम शाही अन्दाज़ में भोजन हो जाता है और आपकी बेटी ऐसे लाइफ स्टाइल की मुरीद हो जाती है।
लड़कियों को ऐसी लाइफस्टाइल का बहुत ज़्यादा शौक़ होता है। बाद का हाल तो पता ही है अब वो बेटी अपने बाप को बुरा आदमी समझ सकती है लेकिन मुस्लिम दोस्तों को नहीं।

ये जो कई तरह से, महीनता के साथ आपकी ज़िंदगी में घुसते हैं ना, इसकी खबर आपको लगती ही नहीं है। आपको पता तब चलता है जब वो लोग पूरे खेल का परिणाम हासिल कर लेते हैं।

बचने का उपाय कोई बाहर वाला तो आकर नहीं दे सकता .....पर आप घर में बेटे बेटियों को पहले तो खर्च और दिखावा करने की आदत पर ढंग से समझाइए। उसको बताइए कि अच्छा स्वास्थ्य से बढ़ कर कोई सुंदरता नहीं होती।
दूसरा उस क़ौम के दुकान से कितना भी सस्ता मिले तो आप ले लो लेकिन किसी दोस्त के माध्यम से वहाँ मत पहुँचो। किसी के कहने पर मत जाओ। इसमें bheemte भी अपनी भूमिका निभाते हैं और आपको मुस्लिम दुकान का पता बतायेंगे। वैसे तो मजबूरी ना हो जाये तब तक ऐसे दुकान का रुख़ ही मत करो।
कल ही मुझे एक सिम कार्ड लेना था, दुकान गया तो देखा टोपी वाला लड़का तो अब काउंटर तक चला ही गया था तो बस rate पूछा और फिर लौट गया।

आगे बढ़ा तो एक हिंदू लड़के का दुकान दिख गया। मराठी करके का था। वहीं से सिम कार्ड लिया एयरटेल का २५० रुपया में। अरे यार इतना तो कर ही सकते हो। चार कदम आगे एक हिंदू दुकान भी है, हमें सिर्फ़ मन में निश्चय करके लौटने की प्रवृत्ति डालनी होगी।
साला मैं तो दिमाग़ में यह भी सोच रहा था कि फ़ेसबुक पर  बॉयकॉट लिखता हूँ या पढ़ता हूँ तो यह बॉयकॉट करूँगा कब? अगले दिन से? अगले महीने से? .....या ये सोचूँ कि एक सामान  ले लेता हूँ, क्या ही हो जाएगा और अगले बार से नहीं ख़रीदूँगा।।।। यही तो होता है इनके दुकान के सामने पहुँचने पर मनःस्थिति।
पर नहीं मैंने बस rate पूछा और वापिस बाइक स्टार्ट करके आगे निकल गया।

बाक़ी आप सब समझदार है, कैसे क्या करना है, घर में बेटे बेटियों को कैसे सम्भालना है, वह ख़ुद के विवेक से निर्णय लीजिए।

_________🌱_________
*शनि-रवि-सोम प्रेरक प्रसंग । यदा कदा तत्कालीन प्रसंग - स्वास्थ्य - हास्य ...*    👉🏼
https://chat.whatsapp.com/H0Qv5FCw4XG3NV5qeChAZ0
_________🌱__________

कुल पेज दृश्य