शनिवार, 12 फ़रवरी 2022

देना ही सीखना है

 

एक बार पचास लोगों का ग्रुप  किसी मीटिंग में हिस्सा ले रहा था।
मीटिंग शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे कि  स्पीकर अचानक ही रुका और सभी पार्टिसिपेंट्स को गुब्बारे देते हुए बोला, ” आप सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम लिखना है। ” सभी ने ऐसा ही किया।
अब गुब्बारों को एक दुसरे कमरे में रख दिया गया।
स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर पांच मिनट के अंदर अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा।
सारे पार्टिसिपेंट्स तेजी से रूम में घुसे और पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने लगे।
पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था…
5 पांच मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया।
स्पीकर बोला , ” अरे! क्या हुआ, आप सभी खाली हाथ क्यों हैं ? क्या किसी को अपने नाम
वाला गुब्बारा नहीं मिला ?”  ”नहीं ! हमने बहुत ढूंढा पर हमेशा किसी और के नाम का ही गुब्बारा हाथ आया…”, एक
पार्टिसिपेंट कुछ मायूस होते हुए बोला।

“कोई बात नहीं , आप लोग एक बार फिर कमरे में जाइये, पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले उसे अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति का नाम पुकारे जिसका नाम उसपर लिखा हुआ है।“  स्पीकर ने निर्दश दिया।

एक बार फिर सभी पार्टिसिपेंट्स कमरे में गए, पर इस बार सब शांत थे , और कमरे में किसी तरह की अफरा- तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने एक दुसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए और तीन मिनट में ही बाहर निकले आये।
स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा,” बिलकुल यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है।
हर कोई अपने लिए ही जी रहा है , उसे इससे कोई
मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है , वह तो बस पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है , पर बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता,  हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है।

जब तुम औरों को उनकी खुशियां देना सीख जाओगे तो अपने आप ही तुम्हे तुम्हारी खुशियां मिल जाएँगी।

और यही मानव- जीवन का उद्देश्य होना चाहिए ।

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सोमवार, 7 फ़रवरी 2022

उलटा रास्ता

 

*चिन्तन के पल...*

एक पुराना सा किस्सा है जिसे रूसी किम्वदंती बताया जाता है। संभवतः उस दौर की कहानी होगी जब कम्युनिस्ट शासन आम किसानों की जमीनें छीनने के लिए उन्हें पकड़-पकड़ कर जेल में बंद कर रहा था। अपनी जमीनों पर से अधिकार न छोड़ने वाले कई ऐसे किसानों की साइबेरिया जैसी जगहों पर नाज़ियों जैसे कंसंट्रेशन कैंप में भेजे जाने से मौत भी हुई थी। ऐसी ही एक जेल में एक युवक बंद था जब उसके पास उसके पिता की चिट्ठी आई। उसमें लिखा था कि आलू बोने का मौसम हो चला है। मैं बूढ़ा हो गया हूँ, उतना काम नहीं कर पाता। अगर तुम जेल में न डाल दिए गए होते, तो तुम भी मेरी मदद करते, लेकिन मैं अकेला ही काम पूरा करने की कोशिश करूँगा।

चिट्ठी बेटे को मिले कुछ ही समय हुआ था कि एक दिन पुलिस पूरे दल-बल के साथ बूढ़े बाप के घर आ धमकी। उन्होंने पूरे इलाके को घेर लिया। बूढ़े से उसके खेतों का रास्ता पूछा और वहां पहुंचकर लगे इधर-उधर खुदाई करने। थोड़ी ही देर में पूरा खेत खोद डाला गया था। आखिर खीजकर पुलिस कप्तान ने बूढ़े को एक चिट्ठी थमाई और कुछ नहीं मिला कहकर चला गया। बूढ़े ने चिट्ठी खोली तो बेटे की चिट्ठी थी जिसमें लिखा था, “खेत हरगिज मत खोदना। विद्रोह के लिए इकठ्ठा किये हथियार मैंने खेतों में दबाये हैं।” थोड़े दिन बाद जेल से बेटे की दूसरी चिट्ठी आई। इस बार लिखा था, “उम्मीद है खेत खोद डाले गए होंगे। जेल से मैं इतनी ही मदद कर सकता था।”
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आप इसे “थिंकिंग आउट ऑफ़ द बॉक्स” कह सकते हैं।  जो स्रोत या संसाधन आपके पास नहीं हैं, उनके बारे में सोचकर परेशान होने से बेहतर है कि “जुगाड़ टेक्नोलॉजी” का प्रयोग करें। सुलझ न सके, ऐसी कोई समस्या नहीं होती।

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रविवार, 6 फ़रवरी 2022

दिशा

 

एक दिन एक बुजुर्ग आदमी दनदनाता हुआ शहर के एक नामी, पर सज्जन वकील के दफ़्तर में घुसा।

उसके हाथों में कागज़ो का बंडल, धूप में काला हुआ चेहरा, बढ़ी हुई दाढ़ी औऱ उसके सफेद कपड़े में मिट्टी लगी हुई थी।"

बुजुर्ग ने वकील से कहा - " उसके पूरे फ्लैट पर स्टे लगाना है, बताइए, क्या क्या कागज और चाहिए... क्या लगेगा खर्चा...लेकिन काम जल्दी होना चाहिए  ".....

वकील साहब ने उन्हें बैठने का कहा - "रामू , पानी दे इधर"...वकील ने आवाज़ लगाई

उसके बाद वो बुजुर्ग कुर्सी पर बैठे ।

फ़िर उनके सारे कागजात वकील साहब ने देखे, उनसे सारी जानकारी ली औऱ इस तरह आधा पौना घंटा गुजर गया।

"मै इन कागज़ो को अच्छी तरह देख लेता हूँ, फिर आपके केस पर विचार करेंगे। आप ऐसा कीजिए, अगले शनिवार को मिलिए मुझसे।" वकील साहब ने कहा.....

चार दिन बाद वो बुजुर्ग फिर से वकील के यहाँ आए- वैसे ही कपड़े, बहुत गुस्से में लग रहे थे,वे अपने छोटे भाई पर गुस्सा थे।

वकील ने उन्हें बैठने का कहा ।

वो बैठे ।

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ऑफिस में अजीब सी खामोशी गूंज रही थी।

वकील साहब ने बात की शुरुआत की.... बाबा, मैंने आपके सारे पेपर्स देख लिए.....और आपके परिवार के बारे में और आपकी निजी जिंदगी के बारे में भी मैंने बहुत जानकारी हासिल की।मेरी जानकारी के अनुसार: आप दो भाई है, एक बहन है,आपके माँ-बाप बचपन में ही गुजर गए।बाबा आप नौवीं पास है और आपका छोटा भाई इंजिनियर है। छोटे भाई की पढ़ाई के लिए आपने स्कूल छोड़ा, लोगो के खेतों में दिहाड़ी पर काम किया,
कभी अंग भर कपड़ा और पेट भर खाना आपको नहीं मिला ,फिर भी भाई की पढ़ाई के लिए पैसों की कमी आपने कभी नहीं होने दी। एक बार खेलते खेलते भाई पर किसी बैल ने सींग घुसा दिए, तब भाई लहूलुहान हो गया।
फिर आप उसे अपने कंधे पर उठाकर 5 किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल लेे गए। सही देखा जाए तो आपकी उम्र भी नहीं थी ये करने की, पर भाई में जान बसी थी आपकी। माँ बाप के बाद मै ही इनका माँ-बाप… ये भावना थी आपके मन में, आपका भाई इंजीनियरिंग में अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले पाया और आपका दिल खुशी से भरा हुआ था। फिर आपने जी तोड़ मेहनत की।
80,000 की सालाना फीस भरने के लिए आपने रात दिन एक कर दिया यानि बीवी के गहने गिरवी रख के कभी साहूकार से पैसा लेकर आपने उसकी हर जरूरत पूरी की।फिर अचानक उसे किडनी की तकलीफ शुरू हो गई, डॉक्टर ने किडनी बदलने के लिए कहा और
आपने अगले मिनट में अपनी किडनी उसे दे दी , यह कह कर कि कल तुझे अफसर बनना है,नौकरी करनी है, कहाँ कहाँ घूमेगा बीमार शरीर लेे के। मुझे तो गाँव में ही रहना है । फिर भाई मास्टर्स के लिए हॉस्टल पर रहने गया।लड्डू बने, देने जाओ, खेत में मकई तैयार हुई, भाई को देने जाओ, कोई तीज त्योहार हो, भाई को कपड़े दो ।घर से हॉस्टल 25 किलोमीटर तुम उसे डिब्बा देने साइकिल पर गए।हाथ का निवाला पहले भाई को खिलाया तुमने।फिर वो मास्टर्स पास हुआ, तुमने पूरे गाँव को खाना खिलाया।फिर उसने उसी के कॉलेज की लड़की जो दिखने में एकदम सुंदर थी, से शादी कर ली । तुम सिर्फ समय पर ही वहाँ गए।भाई को नौकरी लगी, 3 साल पहले उसकी शादी हुई, अब तुम्हारा बोझ हल्का होने वाला था। पर किसी की नज़र लग गई आपके इस प्यार को। शादी के बाद भाई ने घर आना बंद कर दिया। पूछा तो कहता है मैंने बीवी को वचन दिया है। घर एक भी पैसा वो देता नहीं, पूछा तो कहता है कर्ज़ा सिर पे है।पिछले साल शहर में फ्लैट खरीदा।पैसे कहाँ से आए पूछा तो कहता है कर्ज लिया है। मैंने मना किया तो कहता है भाई, तुझे कुछ नहीं मालूम, तू निरा गंवार ही रह गया। अब तुम्हारा भाई चाहता है कि गाँंव की आधी खेती बेच कर उसे पैसा दे दे।

इतना कह के वकील साहब रुके - रामू की लाई चाय की प्याली उन्होंने अपनी मुँह से लगाई - तुम चाहते हो भाई ने जो मांगा वो उसे ना देकर उसके ही फ्लैट पर स्टे लगाया जाए - क्यों बाबा,यही चाहते हो तुम..."  ????

वो तुरंत बोला, "हां वकील साहब "

वकील साहब ने कहा - हम स्टे लेे सकते है औऱ भाई के प्रॉपर्टी में हिस्सा भी माँग सकते हैं  पर….

1) तुमने उसके लिए जो खून पसीना एक किया है वो नहीं मिलेगा

2) तुम्हारीे दी हुई किडनी तुम्हें वापस नहीं मिलेगी

3) तुमने उसके लिए जो ज़िन्दगी खर्च की है वो भी वापस नहीं मिलेगी।

मुझे लगता है इन सब चीजों के सामने उस फ्लैट की कीमत शुन्य है। भाई की नीयत फिर गई, वो अपने रास्ते चला गया अब तुम भी उसी कृतघ्न सड़क पर मत जाओ।वो भिखारी निकला, तुम दिलदार थे।दिलदार ही रहो ….. तुम्हारा हाथ ऊपर था, ऊपर ही रखो।कोर्ट कचहरी करने की बजाय बच्चों को पढ़ाओ लिखाओ।पढ़ाई कर के तुम्हारा भाई बिगड़ गया लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हारे बच्चे भी ऐसा करेंगे।"

वो बुजुर्ग वकील साहब के मुँह को ताकने लगा।

वकील साहब की पूरी बात सुनकर बुजुर्ग उठ खड़ा हुआ, सब काग़ज़ात उठाए और आँखे पोछते हुए बोला - "चलता हूँ, वकील साहब।"

उसकी रूलाई फुट रही थी और वो किसी को दिख ना जाए, ऐसी कोशिश कर रहा था।

इस बात को अरसा गुजर गया ।कल वो अचानक फिर वकील साहब के ऑफिस में आया।

कलमों में सफेदी झाँक रही थी उसके। साथ में एक नौजवान था और हाथ में थैली।

वकील ने कहा- "बाबा, बैठो"

उसने कहा, "बैठने नहीं आया वकील साहब, मिठाई खिलाने आया हूँ । ये मेरा बेटा, बैंक मैनेजर है, बैंगलोर रहता है, कल आया गाँव।अब तीन मंजिला मकान बना लिया है वहाँ।थोड़ी थोड़ी कर के 10–12 एकड़ खेती खरीद ली अब।"

वकील साहब उसके चेहरे से टपकते हुए खुशी को महसूस कर रहा था

बुजुर्ग ने फ़िर कहा..."वकील साहब, आपने मुझसे बोला था -  कोर्ट कचहरी के चक्कर में मत पड़ो, आपने बहुत नेक सलाह दी और मुझे उलझन से बचा लिया जबकि गाँव में सब लोग मुझे भाई के खिलाफ उकसा रहे थे।मैंने उनकी नहीं, आपकी बात सुन ली और मैंने अपने बच्चों को लाइन से लगाया और भाई के पीछे अपनी ज़िंदगी बरबाद नहीं होने दी। कल भाई और उनकी पत्नी भी घर आए थे। पाँव छू छूकर माफी मांगने लगे। मैंने अपने भाई को गले से लगा लिया और मेरी धर्मपत्नी ने उसकी धर्मपत्नी को गले से लगा लिया। हमारे पूरे परिवार ने बहुत दिनों बाद एक साथ भोजन किया। बस फिर क्या था आनंद की लहर घर में दौड़ने लगी।

वकील साहब के हाथ का पेडा हाथ में ही रह गया औऱ उनके आंसू टपक गए आखिर. .. .अपने गुस्से को सही दिशा में मोड़ा जाए तो जीवन में क़भी पछताने की जरूरत नहीं पड़ेगी ।हां... दिल थोड़ा बड़ा रखने की जरुरत है .........

शनिवार, 5 फ़रवरी 2022

सब उसके हाथ

 

एक जापानी कथा है। एक युवक विवाहित हुआ। अपनी पत्नी को ले कर—समुराई था, क्षत्रिय था—अपनी पत्नी को लेकर नाव में बैठा। दूसरी तरफ उसका गांव था। बड़ा तूफान आया, अंधड़ उठा, नाव डावाडोल होने लगी, डूबने—डूबने को होने लगी। पत्नी तो बहुत घबरा गई। मगर युवक शांत रहा। उसकी शांति ऐसी थी जैसे बुद्ध की प्रतिमा हो।

उसकी पत्नी ने कहा, तुम शांत बैठे हो, नाव डूबने को हो रही, मौत करीब है!

उस युवक ने झटके से अपनी तलवार बाहर निकाली, पत्नी के गले पर तलवार लगा दी। पत्नी तो हंसने लगी।

उसने कहा : क्या तुम मुझे डराना चाहते हो ?

पति ने कहा : तुझे डर नहीं लगता? तलवार तेरी गर्दन पर रखी, जरा—सा इशारा कि गर्दन इस तरफ हो जाएगी।

उसने कहा : जब तलवार तुम्हारे हाथ में है तो मुझे भय कैसा?

उसने तलवार वापिस रख ली।

उसने कहा : यह मेरा उत्तर है। जब तूफान—आधी उसके हाथ में है तो मैं क्यों परेशान होऊं? डुबाना होगा तो डूबेंगे, बचाना होगा तो बचेंगे। जब तलवार मेंरे हाथ में है तो तू नहीं घबराती। मुझसे तेरा प्रेम है, इसलिए न! कल विवाह न हुआ था, उसके पहले अगर मैंने तलवार तेरे गले पर रखी होती तो? तो तू चीख मारती। आज तू नहीं घबराती, क्योंकि प्रेम का एक सेतु बन गया। ऐसा सेतु मेरे और परमात्मा के बीच है, इसलिए मैं नहीं घबराता।तूफान आए, चलो ठीक, तूफान का मजा लेंगे। डूबेंगे, तो डूबने का मजा लेंगे। क्योंकि सब उसके हाथ में है, हम उसके हाथ के बाहर नहीं हैं। फिर चिंता कैसी?

चितया दुःखं जायते……।

और कोई ढंग से चिंता पैदा नहीं होती, बस चिंता एक ही है कि तुम कर्ता हो। कर्ता हो तो चिंता है, चिंता है तो दुख।

इति निश्चयी सुखी शांत: सर्वत्र गलितस्पृह।

ऐसा जिसने निश्चयपूर्वक जाना, अनुभव से निचोड़ा—वह व्यक्ति सुखी हो जाता है, शांत हो जाता है, उसकी सारी स्पृहा समाप्त हो जाती है।

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