शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

संक्रांति

 

आज सभी हिन्दू सनातनी मित्रों को मकर-संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ..!

हम सभी जानते हैं कि.... मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य भगवान "दक्षिणायण" से "उत्तरायण" में प्रवेश करते हैं.

लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आखिर.... यह सूर्य का "दक्षिणायण" या "उत्तरायण" आखिर होता क्या है ?

और, अगर मकर संक्राति पर सूर्य भगवान "दक्षिणायण" से "उत्तरायण" में आ जाते हैं....
तो फिर, "उत्तरायण" से "दक्षिणायण" में कब जाते हैं ???

असल में भारतीय खगोल विज्ञान के अनुसार बारह राशियां होती है... तथा, सूर्य हर एक राशि लगभग 1 महीना  रहता है.

हमारी बारह राशियों के नाम इस प्रकार हैं.... मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, बृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ तथा मीन.

और, जिस दिन सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करता है उसे संक्राति कहते है.

इसका मुख्य कारण यह है कि... पृथ्वी अपनी अक्ष पर थोड़ा झुकी हुई है... यही कारण है कि सूरज पूरब से निकलता तो  है लेकिन उसका एक ही निश्चित स्थान नहीं है.

यदि आप प्रतिदिन सूर्योदय को देखे तो आपको पता चलेगा कि कल सूर्य जिस स्थान से निकला था आज उसका स्थान कल वाले स्थान से थोड़ा सा उत्तर या दक्षिण की ओर शिफ्ट हो गया है.....!

सर्दियों में दिन छोटे होते हैं अर्थात सूर्य देर से निकलता है.

इसका मतलब हुआ कि सर्दियों में सूर्य दक्षिणायन रहते हैं.

लेकिन, मकर संक्रांति के बाद सूर्योदय का स्थान प्रतिदिन उत्तर की और शिफ्ट होना शुरू हो जाता है.

इसी कारण कहा जाता है कि.... मकर संक्रांति को सूर्य भगवान की गति "उत्तरायण" हो गई है.

मकर संक्रांति के बाद यह गति सावन के महीने (जुलाई ) की "कर्क संक्रांति" तक लगातार उत्तर की तरफ बनी रहती है.

और, सावन के महीने में सूर्य के "कर्क राशि" में आने के बाद सूर्योदय का स्थान उत्तर से दक्षिण की तरफ शिफ्ट होने लगता है.

इसको सूर्य की गति "दक्षिणायण" हो जाना कहते है .

और, इस संक्राति को कर्क संक्रांति या श्रावण संक्रांति भी कहते हैं.

'कर्क संक्रान्ति' से वर्षा ऋतु का आगमन हो जाता है और 'चातुर्मास' या 'चौमासा' का भी आरंभ इसी समय से हो जाता है.

सोचने वाली बात है कि.... जब गैलीलीयो ने पृथ्वी को चलायमान कहा था तो उनके ही मजहबी भाई-बहनों ने उसे पागल घोषित करके मार दिया था..

और, मजहबी लोगों ने तो बाकायदा धरती तो चपटा एवं सूर्य को दलदल में रखने वाले वाला गेंद बता रखा है जिसे महामद रोज सुबह झाड़ पोंछ कर आकाश में लगा देता.

पूरी पृथ्वी पर सिर्फ हिन्दू सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो हजारों लाखों साल से... मकर संक्रांति के माध्यम से पूरी दुनिया को ये बता रहा है कि..... पृथ्वी और सूर्य न सिर्फ चलायमान हैं बल्कि पृथ्वी अपने अक्ष पर थोड़ी झुकी हुई भी है.

जिस कारण पृथ्वी के सापेक्ष में सूर्य उत्तरायण और दक्षिणायन होता रहता है.

तो, फिर अपने ऐसी वैज्ञानिक जानकारी बताने एवं त्योहार के रूप में ऐसी सीख देने वाले हमारे सनातन हिन्दू धर्म पर हमें आखिर क्यों न गर्व हो...!
हम सब हिन्दू पूर्वजों की संतान हैं !!
गर्व से कहो....हम हिन्दू हैं.  -सतीश

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बुधवार, 12 जनवरी 2022

ह्रदय की देखभाल

 

स्वास्थ्य चर्चा ...

बात हृदय की देखभाल की।

जब इन्सान मां के पेट में होता हैं तो हृदय धड़कना शुरू करता है और इंसान की मृत्यु होने पर ही इसकी धड़कन बंद होती है।
हृदय परमपिता परमेश्वर की अनमोल संरचना है।

हम थकावट होने पर आराम करते हैं। रात को सोते हैं लेकिन हमारा हृदय लगातार धड़कता रहता है। हृदय ने धड़कना बंद किया तो जिंदगी का खेल खत्म।

तो हमारी भी जिम्मेवारी बनती है कि हमारे शरीर के इतने महत्वपूर्ण अंग का हम भी ख्याल रखें।

वर्तमान समय में खान-पान और तनाव भरे जीवन के कारण हृदयाघात के केस बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। फास्ट फूड का इसमें सबसे ज्यादा योगदान है।

एक बात तो सबको पता है हम बाइक या स्कूटी चलाते समय हेलमेट इसलिए पहनते हैं ताकि कोई दुर्घटना की स्थिति में हमारा सिर सुरक्षित रहे।

बिल्कुल ऐसे ही हमारी जिम्मेवारी बनती है कि हम हमारे हृदय की भी ऐसे ही देखभाल करें।

हार्ट ब्लॉकेज धीरे-धीरे होती है जिसका हमें पता ही नहीं चलता।बाद में जिसके घातक परिणाम हार्ट अटैक के रुप में आता हैं।

अगर समय रहते (खासकर 40 की उम्र के बाद) हम समझदारी से काम ले तो हार्ट अटैक की समस्या से बचा जा सकता है।

नीचे दी गई दो आयुर्वेदिक दवाओं के सेवन से हृदयाघात के खतरे को टाला जा सकता है।

1.अर्जुन की छाल..

अर्जुन की छाल का उपयोग साल में दो या तीन महीने करें (खासकर सर्दी के दिनों में) अर्जुन की छाल का एक चम्मच एक गिलास पानी में धीमी आंच में उबाल लें। जब पानी का गिलास आधा रह जाए तो ठंडा होने के बाद उसको बगैर छाने पी ले।

अर्जुन की छाल का एक चम्मच रात को सोते समय गर्म दूध के साथ भी लिया जा सकता है या फिर दूध में मिलाकर भी पिया जा सकता है।

गर्मी के मौसम में इसको आधी मात्रा में ले सकते हैं क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।

2. अर्जुनारिष्ट....

साल में 3 महीने (किसी भी मौसम में) अर्जुनारिष्ट का सेवन करें।

सुबह और शाम खाना खाने के 15 मिनट के बाद 6 चम्मच दवाई और 6 चम्मच गुनगुना पानी मिलाकर पी लें।

इन विधियों के उपयोग के बाद हृदय की धमनियों में कोई रुकावट पैदा नहीं होगी और हृदय स्वस्थ अवस्था में अपना काम करता रहेगा।

नोट: हृदयामृत गोली आती है। इसका सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है। दो गोली सुबह और दो शाम को खाना खाने से 2 घंटे पहले चबाकर ले ले।

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सोमवार, 10 जनवरी 2022

काबिलियत

 

एक रेस्टोरेंट में अचानक ही एक कॉकरोच उड़ते हुए आया और एक महिला की कलाई पर बैठ गया।

महिला भयभीत हो गयी और उछल-उछल कर चिल्लाने लगी…कॉकरोच…कॉकरोच…

उसे इस तरह घबराया देख उसके साथ आये बाकी लोग भी पैनिक हो गए …इस आपाधापी में महिला ने एक बार तेजी से हाथ झटका और कॉकरोच उसकी कलाई से छटक कर उसके साथ ही आई एक दूसरी महिला के ऊपर जा गिरा। अब इस महिला के चिल्लाने की बारी थी…वो भी पहली महिला की तरह ही घबरा गयी और जोर-जोर से चिल्लाने लगी!

दूर खड़ा वेटर ये सब देख रहा था, वह महिला की मदद के लिए उसके करीब पहुंचा कि तभी कॉकरोच उड़ कर उसी के कंधे पर जा बैठा।

वेटर चुपचाप खड़ा रहा।  मानो उसे इससे कोई फर्क ही ना पड़ा, वह ध्यान से कॉकरोच की गतिविधियाँ देखने लगा और एक सही मौका देख कर उसने पास रखा नैपकिन पेपर उठाया और कॉकरोच को पकड़ कर बाहर फेंक दिया।

मैं वहां बैठ कर कॉफ़ी पी रहा था और ये सब देखकर मेरे मन में एक सवाल आया….क्या उन महिलाओं के साथ जो कुछ भी हुआ उसके लिए वो कॉकरोच जिम्मेदार था?

यदि हाँ, तो भला वो वेटर क्यों नहीं घबराया?

बल्कि उसने तो बिना परेशान हुए पूरी सिचुएशन को पेर्फेक्ट्ली हैंडल किया।

दरअसल, वो कॉकरोच नहीं था, बल्कि वो उन औरतों की अक्षमता थी जो कॉकरोच द्वारा पैदा की गयी स्थिति को संभाल नहीं पायीं।

मैंने रियलाइज़ किया है कि ये मेरे पिता, मेरे बॉस या मेरी वाइफ का चिल्लाना नहीं है जो मुझे डिस्टर्ब करता है, बल्कि उनके चिल्लाने से पैदा हुई डिस्टर्बेंस को हैंडल ना कर पाने की मेरी काबिलियत है जो मुझे डिस्टर्ब करती है।

ये रोड पे लगा ट्रैफिक जाम नहीं है जो मुझे परेशान करता है बल्कि जाम लगने से पैदा हुई परेशानी से डील ना कर पाने की मेरी अक्षमता है जो मुझे परेशान करती है।

यानि problems से कहीं अधिक, मेरा उन problems पर reaction है जो मुझे वास्तव में परेशान करता है।

मैं इन सब से सीखता हूँ कि मुझे लाइफ में react नहीं respond करना चाहिए।

महिलाओं ने कॉकरोच की मौजूदगी पर react किया था जबकि वेटर ने respond किया था… रिएक्शन हमेशा instinctive होता है …बिना सोचे-समझे किया जाता है जबकि response सोच समझ कर की जाने वाली चीज है।

जीवन को समझने का एक सुन्दर तरीका-

जो लोग सुखी हैं वे इसलिए सुखी नहीं हैं क्योंकि उनके जीवन में सबकुछ सही है…वो इसलिए सुखी हैं क्योंकि उनके जीवन में जो कुछ भी होता है उसके प्रति उनका attitude सही होता है।

महान साइकेट्रिस्ट Viktor Frankl का भी कहना था-

"Stimulus और response के बीच में एक space होता है। उसी space में हमारे पास अपना response चुनने की शक्ति होती है।  और हमारे रिस्पोंस में ही हमारी growth और हमारी स्वतंत्रता निहित है।"

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रविवार, 9 जनवरी 2022

फल की इच्छा

 

एक बार अकबर ने तानसेन से कहा था कि तेरा वीणावादन देखकर कभी—कभी यह मेरे मन में खयाल उठता है कि कभी संसार में किसी आदमी ने तुझसे भी बेहतर बजाया होगा या कभी कोई बजाएगा? मैं तो कल्पना भी  नहीं कर पाता कि इससे श्रेष्ठतर कुछ हो सकता ‘है।

तानसेन ने कहा,क्षमा करें, शायद आपको पता नहीं कि मेरे: गुरु अभी जिन्दा हैं। और एक बार अगर आप उनकी वीणा सुन लें तो कहां वे और कहां मैं!

बड़ी जिज्ञासा जगी अकबर को। अकबर ने कहा तो फिर उन्हें बुलाओ! तानसेन ने कहा, इसीलिए कभी मैंने उनकी बात नही छेड़ी। आप मेरी सदा प्रशंसा करते थे, मैं चुपचाप पी लेता था, जैसे जहर का घूंट कोई पीता है, क्योंकि मेरे गुरु अभी जिन्दा हैं, उनके सामने मेरी क्या प्रशंसा! यह यूं ही है जैसे कोई सूरज को दीपक दिखाये। मगर मैं चुपचाप रह जाता था, कुछ कहता न था, आज न रोक सका अपने को, बात निकल गयी। लेकिन नहीं कहता था इसीलिए कि आप तत्‍क्षण कहेंगे, ‘उन्हें बुलाओ’। और तब मैं मुश्किल में पड़ुगा, क्योंकि वे यूं आते नहीं। उनकी मौज हो तो जंगल में बजाते हैं, जहां कोई सुननेवाला नहीं। जहां कभी—कभी जंगली जानवर जरूर इकट्ठे हो जाते हैं सुनने को। वृक्ष सुन लेते हैं, पहाड़ सुन लेते हैं। लेकिन फरमाइश से तो वे कभी बजाते नहीं। वे यहां दरबार मे न आएंगे। आ भी जाएं किसी तरह और हम कहें उनसे कि बजाओ तो वे बजाएंगे नहीं।

तो अकबर ने कहा, फिर क्या करना पड़ेगा, कैसे सुनना पड़ेगा? तो तानसेन ने कहा, एक ही उपाय है कि यह मैं जानता हूं कि रात तीन बजे वे उठते हैं, यमुना के तट पर आगरा में रहते हैं—हरिदास उनका नाम है—हम रात में चलकर छुप जाएं—दो बजे रात चलना होगा; क्योंकि कभी तीन बजे बजाए, चार बजे —बजाए, पांच बजे बजाए; मगर एक बार (जरूर सुबह—सुबह स्नान के बाद वे वीणा बजाते हैं— तो हमें चोरी से ही सुनना होगा, बाहर झोपड़े के छिपे रहकर सुनना होगा।.. शायद ही दुनिया के इतिहास में किसी सम्राट ने, अकबर जैसे बड़े सम्राट ने चोरी से किसी की वीणा सुनी हो!.. लेकिन अकबर गया।

दोनों छिपे रहे एक झाड़ की ओट में, पास ही झोपड़े के पीछे। कोई तीन बजे स्नान करके हरिदास यमुना सै आये और उन्होंने अपनी वीणा उठायी और बजायी। कोई घंटा कब बीत गया—यूं जैसे पल बीत जाए! वीणा तो बंद हो गयी, लेकिन जो राग भीतर अकबर के जम गया था वह जमा ही रहा।

आधा घंटे बाद तानसेन ने उन्हें हिलाया और कहा कि अब सुबह होने के करीब है, हम चलें! अब कब तक बैठे रहेंगे। अब तो वीणा बंद भी हो. चुकी। अकबर ने कहा, बाहर की तो वीणा बंद हो गयी मगर भीतर की वीणा बजी ही चली जाती है। तुम्हें मैंने बहुत बार सुना, तुम जब बंद करते हो तभी बंद ‘हो जाती है। यह पहला मौका है कि जैसे मेरे भीतर के तार छिड़ गये हैं।। और आज सच में ही मैं तुमसे कहता हूं कि तुम ठीक ही कहते थे कि कहा तुम और कहां तुम्हारे गुरु!

अकबर की आंखों से आंसू झरे जा रहे हैं। उसने कहा, मैंने बहुत संगीत सुना, इतना भेद क्यों है? और तेरे संगीत में और तेरे गुरु के संगीत में इतना भेद क्यों है? जमीन—आसमान का फर्क है।

तानसेन ने कहा - कुछ बात कठिन नहीं है। मैं बजाता हूं कुछ पाने के लिए; और वे बजाते हैं क्योंकि उन्होंने कुछ पा लिया है। उनका बजाना किसी उपलब्‍धि की,किसी अनुभूति की अभिव्यक्ति है। मेरा बजाना तकनीकी है। मैं बजाना जानता हूं मैं बजाने का पूरा गणित जानता हूं मगर गणित! बजाने का अध्यात्म मेरे पास नहीं! और मैं जब बजाता होता हूं तब भी इस आशा में कि आज क्या आप देंगे? हीरे का हार भेंट करेंगे, कि मोतियों की माला, कि मेरी झोली सोने से भर देंगे, कि अशार्फेयों से? जब बजाता हूं तब पूरी नजर भविष्य पर अटकी रहती है, फल पर लगी रहती है। वे बजा रहे हैं, न कोई फल है, न कोई भविष्य,वर्तमान का क्षण ही सब कुछ है। उनके जीवन में साधन और साध्य में बहुत फर्क है, साधन ही साध्य है; ओर मेरे जीवन में अभी साधन और साध्य में कोई फर्क नहीं है। बजाना साधन है। पेशेवर हूं मैं।  उनका बजाना आनंद है, साधन नहीं।  वे मस्ती में हैं।

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