शनिवार, 8 जनवरी 2022

कल की चिंता

 

एक नगर का सेठ अपार धन सम्पदा का स्वामी था। एक दिन उसे अपनी सम्पत्ति के मूल्य निर्धारण की इच्छा हुई। उसने तत्काल अपने लेखा अधिकारी को बुलाया और आदेश दिया कि मेरी सम्पूर्ण सम्पत्ति का मूल्य निर्धारण कर ब्यौरा दीजिए, पता तो चले मेरे पास कुल कितनी सम्पदा है।

सप्ताह भर बाद लेखाधिकारी ब्यौरा लेकर सेठ की सेवा में उपस्थित हुआ। सेठ ने पूछा- “कुल कितनी सम्पदा है?” लेखाधिकारी नें कहा – “सेठ जी, मोटे तौर पर कहूँ तो आपकी सात पीढ़ी बिना कुछ किए धरे आनन्द से भोग सके इतनी सम्पदा है आपकी”

लेखाधिकारी के जाने के बाद सेठ चिंता में डूब गए, ‘तो क्या मेरी आठवी पीढ़ी भूखों मरेगी?’ वे रात दिन चिंता में रहने लगे।  तनाव ग्रस्त रहते, भूख भाग चुकी थी, कुछ ही दिनों में कृशकाय हो गए। सेठानी द्वारा बार बार तनाव का कारण पूछने पर भी जवाब नहीं देते। सेठानी से हालत देखी नहीं जा रही थी। उसने मन स्थिरता व शान्त्ति के किए साधु संत के पास सत्संग में जाने को प्रेरित किया। सेठ को भी यह विचार पसंद आया। चलो अच्छा है, संत अवश्य कोई विद्या जानते होंगे जिससे मेरे दुख दूर हो जाय।

सेठ सीधा संत समागम में पहूँचा और एकांत में मिलकर अपनी समस्या का निदान जानना चाहा। सेठ नें कहा- “महाराज मेरे दुख का तो पार नहीं है, मेरी आठवी पीढ़ी भूखों मर जाएगी। मेरे पास मात्र अपनी सात पीढ़ी के लिए पर्याप्त हो इतनी ही सम्पत्ति है। कृपया कोई उपाय बताएँ कि मेरे पास और सम्पत्ति आए और अगली पीढ़ियाँ भूखी न मरे। आप जो भी बताएं मैं अनुष्ठान, विधी आदि करने को तैयार हूँ”

संत ने समस्या समझी और बोले- “इसका तो हल बड़ा आसान है। ध्यान से सुनो सेठ, बस्ती के अन्तिम छोर पर एक बुढ़िया रहती है, एक दम कंगाल और विपन्न। उसके न कोई कमानेवाला है और न वह कुछ कमा पाने में समर्थ है। उसे मात्र आधा किलो आटा दान दे दो। अगर वह यह दान स्वीकार कर ले तो इतना पुण्य उपार्जित हो जाएगा कि तुम्हारी समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाएगी। तुम्हें अवश्य अपना वांछित प्राप्त होगा।”

सेठ को बड़ा आसान उपाय मिल गया। उसे सब्र कहां था, घर पहुंच कर सेवक के साथ कुन्तल भर आटा लेकर पहुँच गया बुढिया के झोपडे पर। सेठ नें कहा- “माताजी मैं आपके लिए आटा लाया हूँ इसे स्वीकार कीजिए”

बूढ़ी मां ने कहा- “बेटा आटा तो मेरे पास है, मुझे नहीं चाहिए”

सेठ ने कहा- “फिर भी रख लीजिए”

बूढ़ी मां ने कहा- “क्या करूंगी रख के मुझे आवश्यकता नहीं है”

सेठ ने कहा- “अच्छा, कोई बात नहीं, कुन्तल नहीं तो यह आधा किलो तो रख लीजिए”

बूढ़ी मां ने कहा- “बेटा, आज खाने के लिए जरूरी, आधा किलो आटा पहले से ही  मेरे पास है, मुझे अतिरिक्त की जरूरत नहीं है”

सेठ ने कहा- “तो फिर इसे कल के लिए रख लीजिए”

बूढ़ी मां ने कहा- “बेटा, कल की चिंता मैं आज क्यों करूँ, जैसे हमेशा प्रबंध होता है कल के लिए कल प्रबंध हो जाएगा”  बूढ़ी मां ने लेने से साफ इन्कार कर दिया।

सेठ की आँख खुल चुकी थी, एक गरीब बुढ़िया कल के भोजन की चिंता नहीं कर रही और मेरे पास अथाह धन सामग्री होते हुए भी मैं आठवी पीढ़ी की चिन्ता में घुल रहा हूँ। मेरी चिंता का कारण अभाव नहीं तृष्णा है।

वाकई तृष्णा का कोई अन्त नहीं है।
संग्रहखोरी तो दूषण ही है।
संतोष में ही शान्ति व सुख निहित है।

_________🌱_________
*शनि,रवि-सोम प्रेरक प्रसंग । यदा कदा तत्कालीन प्रसंग - स्वास्थ्य -  हास्य भी ...😁*    👉🏼
https://chat.whatsapp.com/E2IOZFRlfEX8mBbICLbrS6
-------------🍂-------------
  telegram ग्रुप  ...👉🏼
https://t.me/joinchat/z7DaIwjp8AtlNzZl
______🌱_________
Please Follow...
https://dulmera.blogspot.com/

सोमवार, 3 जनवरी 2022

 

चिंतन के पल....

जब भी कभी आपको लगे कि यह उसे मिला मुझे क्यों नहीं, ऐसा पक्षपात नियति ने आपके साथ क्यों किया है… तो आप बीते वर्ष  2020-21 को याद कर लें, फिर ईश्वर को धन्यवाद देते हुए खुद से पूछें कि…

इन दो लहरों के दरम्यान मैं जीवित रहा, वे क्यों जीवित नहीं रहे जो मेरी ही तरह जीवन से भरे हुए, सपनीली आंखों के साथ न जाने क्या-क्या भविष्य बुन रहे थे।

यह गुजरा समय लौट कर नहीं आना है, आना चाहिए भी नहीं। पर जब भी आपको लगे कि नियति ने आपके साथ पक्षपात किया है… आप याद उन्हें ही कर लें, जो लौट के घर न आये!

हम जीवित हैं, अर्थात् नियति ने हमें उन से काफ़ी अधिक दे दिया है। कृतज्ञ बनें, शिकायती नहीं।

_________🌱_________
*शनि,रवि-सोम प्रेरक प्रसंग । यदा कदा तत्कालीन प्रसंग, स्वास्थ्य - कभी कभार हास्य भी ...😁*    👉🏼
https://chat.whatsapp.com/E2IOZFRlfEX8mBbICLbrS6
-------------🍂-------------
  telegram ग्रुप  ...👉🏼
https://t.me/joinchat/z7DaIwjp8AtlNzZl
______🌱_________
Please Follow...
https://dulmera.blogspot.com/

रविवार, 2 जनवरी 2022

सुंदर व्यवहार

 

एक सभा में गुरु जी ने प्रवचन के दौरान एक 30 वर्षीय युवक को खडा कर पूछा कि

- आप मुम्बई में जुहू चौपाटी पर चल रहे हैं और सामने से एक सुन्दर लडकी आ रही है , तो आप क्या करोगे ?*

युवक ने कहा - उस पर नजर जायेगी, उसे देखने लगेंगे।

गुरु जी ने पूछा - वह लडकी आगे बढ गयी , तो क्या पीछे मुडकर भी देखोगे ?

लडके ने कहा - हाँ, अगर धर्मपत्नी साथ नहीं है तो। (सभा में सभी हँस पडे)

गुरु जी ने फिर पूछा - जरा यह बताओ वह सुन्दर चेहरा आपको कब तक याद रहेगा ?

युवक ने कहा 5 - 10 मिनट तक, जब तक कोई दूसरा सुन्दर चेहरा सामने न आ जाए।

गुरु जी ने उस युवक से कहा - अब जरा कल्पना कीजिये..   आप जयपुर से मुम्बई जा रहे हैं और मैंने आपको एक पुस्तकों का पैकेट देते हुए कहा कि मुम्बई में अमुक महानुभाव के यहाँ यह पैकेट पहुँचा देना...

आप पैकेट देने मुम्बई में उनके घर गए। उनका घर देखा तो आपको पता चला कि ये तो बडे अरबपति हैं। घर के बाहर 10 गाडियाँ और 5 चौकीदार खडे हैं।

उन्हें आपने पैकेट की सूचना अन्दर भिजवाई , तो वे महानुभाव खुद बाहर आए। आप से पैकेट लिया। आप जाने लगे तो आपको आग्रह करके घर में ले गए। पास में बैठाकर गरम खाना खिलाया।

चलते समय आप से पूछा - किसमें आए हो ?
आपने कहा- लोकल ट्रेन में।

उन्होंने ड्राइवर को बोलकर आपको गंतव्य तक पहुँचाने के लिए कहा और आप जैसे ही अपने स्थान पर पहुँचने वाले थे कि उस अरबपति  महानुभाव का फोन आया - भैया, आप आराम से पहुँच गए..

अब आप बताइए कि आपको वे महानुभाव कब तक याद रहेंगे ?

युवक ने कहा - गुरु जी ! जिंदगी में मरते दम तक उस व्यक्ति को हम भूल नहीं सकते।

गुरु जी ने युवक के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा — "यह है जीवन की हकीकत।"

*"सुन्दर चेहरा थोड़े समय ही याद रहता है, पर सुन्दर व्यवहार जीवन भर याद रहता है।"*

बस यही है जीवन का गुरु मंत्र... अपने चेहरे और शरीर की सुंदरता से ज़्यादा अपने व्यवहार की सुंदरता पर ध्यान दें.. जीवन अपने लिए आनंददायक और दूसरों के लिए अविस्मरणीय प्रेरणादायक बन जाएगा..
जीवन का सबसे अच्छा योग , सहयोग हैं !

_________🌱_________
*शनि,रवि-सोम प्रेरक प्रसंग । यदा कदा तत्कालीन प्रसंग, स्वास्थ्य - कभी कभार हास्य भी ...😁*    👉🏼
https://chat.whatsapp.com/HJdJs2vlatK7NP7wr1C84S
-------------🍂-------------
  telegram ग्रुप  ...👉🏼
https://t.me/joinchat/z7DaIwjp8AtlNzZl
______🌱_________
Please Follow...
https://dulmera.blogspot.com/

शनिवार, 1 जनवरी 2022

नज़रिया

 

बीते दिनों फैक्ट्री के पास खाली पड़े ग्राउंड में मेला लगा था। मॉल्स मल्टीप्लेक्स और होटल्स में घूमने वाले बच्चों को मेला दिखाने की उत्सुकता थी।

एक शाम मेले में जा पहुंचे। मुख्य आकर्षण के रूप में भांति भांति के झूले थे। उन झूलों के बीच "झूलों का बाप"  था।
झूलों का बाप यानि .....बड़ा चक्का।

बड़ा चक्का .....हम तो देसी भाषा उसे इसी नाम से जानते हैं। हालांकि अंग्रेज़ी में उसे शायद फेरस व्हील के नाम से पुकारा जाता है।

बड़े चक्के की सवारी करते समय मैं दार्शनिक हो जाता हूँ।
बड़े चक्के का नीचाई से ऊंचाई तक जाना मन को उत्साह .....उल्हास और रोमांच से भर देता है और ऊंचाई से नीचाई तक आने में डर और घबराहट महसूस होती है।

बड़ा चक्का जीवन का फ़लसफ़ा है। इंसान जब ऊंचाई पर जा रहा होता है तब उनका आत्मविश्वास ...उसका रोमांच उसकी अकड़ अलग ही स्तर पर होती है। लेकिन ऊंचाई से नीचे आने पर वही आत्मविश्वास डगमगा जाता है। वही रोमांच हताशा में तब्दील हो जाता है। वही अकड़ ठंडी पड़ जाती है।

बड़ा चक्का वास्तव में जीवन  चक्र है।

ख़ैर। मैं एक लंबे अरसे बाद बड़े चक्के में बैठा। मन रोमांचित था।
मेरे समक्ष एक व्यक्ति विराजमान था जिसके बगल में एक नन्ही सी लड़की बैठी हुई थी।

चक्का घूमा और घूमते ही सामने बैठे व्यक्ति की भाव भंगिमाएं बदलने लगी।

स्पष्ट दिखाई दे रहा था के वह डर रहा है।

अचानक किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से चक्का रुक गया। हम आसमान में लटके हुये थे। शहर का कोना कोना स्पष्ट दिखाई दे रहा था और मैं दृश्य का आनंद ले रहा था।

अचानक मेरी नज़र सामने बैठे व्यक्ति की ओर गयी। घबराहट से उसका चेहरा लाल हो चुका था।

मैंने उससे अंग्रेजी में वार्तालाप प्रारंभ किया और पूछा...."Do you understand english"

डरी सहमी आवाज़ में उसने कहा ....."Yes"....!

मैंने उससे कहा "Don't worry ...... Because if you do your daughter will panic"

मैंने उससे कहा के वह अपने डर या घबराहट को ना दिखाये क्योंकि उसके डर से उसके बगल में बैठी बच्ची घबरा जायेगी। अंग्रेजी में संवाद करने की मूल वजह थी के बच्ची हमारे वार्त्तालाप को समझ ना ले।

बच्ची पहले से ही बहुत बुरी तरह से डरी हुई थी।

मेरे समक्ष करीबन 70-80 फुट की ऊंचाई पर एक बाप बैठा था जिसका चेहरा डर से लाल हो चुका था और उसके बगल में एक नन्ही सी बच्ची बैठी थी जिसने डर के मारे अपनी आंखें बंद कर ली थी।

मेरी बात सुन कर सज्जन ने बच्ची की ओर देखा। फिर उसे उठा कर अपनी गोद में बिठा लिया और अपनी बाहों में जकड़ लिया।

बच्ची इतनी डरी हुई थी के उसकी नन्ही सी आखों से आंसू टपकने लगे।

बच्ची को रोता देख ......बाप अपना डर अपनी घबराहट भूल गया और बोला......"डरना नहीं है। तू तो मेरी शेरनी है। डरना नहीं है।" इसी बीच चक्का चल पड़ा। चक्का ऊपर जाता फिर नीचे आता रहा।
बच्ची आँखें बंद करके बैठी रही। स्वयं बुरी तरह से डरा घबराया सज्जन बार बार बिटिया को कहता रहा....."डरते नहीं ....कुछ नहीं होगा। तू तो मेरी शेरनी है।"

चक्र पूरे कर के झूला रुक गया। बच्ची ने आँखें खोली। बाप ने बेटी को पुचकारा तो बिटिया बाप के गले से लिपट कर पुनः रोने लगी।

मैं इस दृश्य का साक्षी था।

उस आदमी को देख कर मेरी पहली प्रतिक्रिया थी के यह के निहायत ही फ़ट्टू और डरपोक किस्म का इंसान है जो बड़े चक्के में बैठ कर घबरा रहा है।

लेकिन कुछ ही क्षणों पश्चात उसके प्रति मेरी सारी धारणा धूल धूसरित हो गयी।

एक डरे हुये इंसान ने अपना डर भुलाते हुये जब अपनी डरी हुई बच्ची को अपनी बाहों में भर लिया तो मुझे महसूस हुआ के मैं गलत था।

वह स्वयं डर रहा था....बुरी तरह से घबराया हुआ था.....फिर भी अपनी बच्ची के लिये ढाल बना हुआ था।

खुद का मनोबल गिरा हुआ था और बिटिया को शेरनी बता कर उसका मनोबल बढ़ा रहा था।

फर्क नज़र का है। फर्क नज़रिये का है।

मैं उस बाप में एक डरपोक इंसान भी देख सकता था। लेकिन मुझे उसमें एक समर्पित पिता दिखाई दिया।

कुछ इसी तरह से ज़िंदगी को देखना होगा। ज़िंदगी की खामियों को नजरअंदाज ना करते हुये ज़िंदगी की खूबियां देखनी होंगी।

कुछ इसी तरह से स्वयं को देखना होगा। अपने भीतर समावेशित खूबियों को पहचाना होगा।

कुछ इसी तरह से इस दुनिया को देखना होगा।

पहले अच्छाई ....फिर बुराई देखनी होगी।

कमियां हैं ....हम सब में कमियां हैं। लेकिन खूबियां भी तो हैं।
हम सब कमाल हैं....बेमिसाल हैं। खामियां दुनिया को देखने दीजिये।
क्यों ना अपनी ख़ासियत देखी जाये? क्यों ना अपनी खूबियां देखी जायें?
इस नए वर्ष पर हमारी आदतें ऐसी ही बन जाये !!
【रचित】-लेखनी

_________🌱_________
*शनि,रवि-सोम प्रेरक प्रसंग । यदा कदा तत्कालीन प्रसंग, स्वास्थ्य - कभी कभार हास्य भी ...😁*    👉🏼
https://chat.whatsapp.com/HJdJs2vlatK7NP7wr1C84S
-------------🍂-------------
  telegram ग्रुप  ...👉🏼
https://t.me/joinchat/z7DaIwjp8AtlNzZl
______🌱_________
Please Follow...
https://dulmera.blogspot.com/

कुल पेज दृश्य